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  • Monday, 23 May 2022
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न करें अपने तिरंगे का अपमान:ऐश अग्रवाल

न करें अपने तिरंगे का अपमान:ऐश अग्रवाल

हर वर्ष 26 जनवरी को हमारे देश में गणतंत्र दिवस के रूप में मनाया जाता है। हम सभी देशवासियों को भारत कानागरिक होने का गर्व है। 26 जनवरी 1950 को हमारा देश एक प्रजातान्त्रिक गणतंत्र देश बना था। सभी बच्चों के हाथमे  दिन हम तिरंगा झंडा देखते है बच्चे बहोत ख़ुशी से झंडा के सा खेलते है मगर क्या आपको पता है अगले दिन हमेंक्या देखने मिलता है हर तरफ़ कचरे की ढ़ेर में तिरंगा झंडा पड़ा हुआ मिलता है हमें इस्स बात का विशेष ध्यान रखनाचाहिए की अगर हमें कही भी हमारा तिरंगा झंडा पड़ा हुआ मिलता है तो उसे अपने पास रख लेना चायिए 

क्या आपको पता हैं प्रत्येक स्वतंत्र राष्ट्र का अपना एक ध्वज होता है। यह एक स्वतंत्र देश होने का संकेत है। भारतीयराष्ट्री ध्वज की अभिकल्पना पिंगली वैंकैयानन्द ने की थी और इसे इसके वर्तमान स्वरूप में 22 जुलाई 1947 कोआयोजित भारतीय संविधान भा की बैठक के दौरान अपनाया गया था। 

यह 15 अगस्त 1947 को अंग्रेजों से भारत की स्वतंत्रता के कुछ ही दिन पूर्व की गई थी। इसे 15 अगस्त 1947 और 26 जनवरी 1950 के बी भारत के राष्ट्रीय ध्वज के रू में अपनाया गया और इसके पश्चा भारतीय गणतंत्र ने इसेअपनाया। भारत में ‘तिरंगे’ का अर्थ भारतीय राष्ट्रीय ध्वज है। हमें बको यह बात बतानी या सिखानी होगी आप झंडेको लहराएंउसे घर में लगाएंदोस्‍तों को दें पर ऐसा कुछ भी ना करेंजिससे झंडे का अपमान हो। 

क्या आप जानते है ?

जब भी ध्वज फहराया जाए तो उसे म्मानपूर्ण स्थान दिया जाए। उसे ऐसी जगह लगाया जाएजहाँ से वह स्पष्ट रूप सेदिखाई दे।सरकारी भवन पर ध्वज रविवार और अन्य छुट्‍टियों के दिनों में भी सूर्योदय से सूर्यास्त तक फहराया जाता हैविशेष अवसरों पर इसे रात को भी फहराया जा सकता है।ध्वज को सदा स्फूर्ति से फहराया जाए और धीरे-धीरे आदर केसाथ उतारा जाए। फहराते और उतारते समय बिगुल बजाया जाता है तो इस बात का ध्यान रखा जाए कि ध्वज को बिगुलकी आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए।जब ध्वज किसी भवन की खिड़कीबालकनी या अगले हिस्से से आड़ाया तिरछा फहराया जाए तो ध्वज को बिगुल की आवाज के साथ ही फहराया और उतारा जाए।ध्वज का प्रदर्शन सभा मंचपर किया जाता है तो उसे इस प्रकार फहराया जाएगा कि जब वक्ता का मुँह श्रोताओं की ओर हो तो ध्वज उनके दाहिनेओर हो

ध्वज किसी अधिकारी की गाड़ी पर लगाया जाए तो उसे सामने की ओर बीचोंबीच या कार के दाईं ओर लगाया जाए।फटाया मैला ध्वज नहीं फहराया जाता है।ध्वज केवल राष्ट्रीय शोक के अवसर पर ही आधा झुका रहता है।किसी दूसरे ध्वजया पताका को राष्ट्रीय ध्वज से ऊँचा या पर नहीं लगाया जाएगा ही बराबर में रखा जाएगा।ध्वज पर कुछ भी लिखाया छपा नहीं होना चाहिए।

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